
[ बरसों बीत गये, उस ख़ास चेहरे से जुदा हुए, पर उसे खोने का दर्द आज भी दिल में उतना ही तरोताज़ा है, जितना उसरोज़ था, जिसदिन खुदा ने मुझे उम्र भर की यह तकलीफ दे डाली थी. सुना था, वक़्त हर घाव भर देता है, फिर मेरे घाव क्यों नहीं भर सके ? मैं पूछूँ भी तो किससे ? उस खुदा से, जो सबकी सुनकर भी करता वही है, जो उसे खुद को मंज़ूर होता है ? शायद इसीलिए उसे खुदा कहते हैं. उसके क्या उसूल हैं, मैं नहीं जानता, मेरा दिल तो बस एक ही सवाल करता है - ]ऐ खुदा ! किसने दिया, तुझको खुदा का नाम है ?वक़्त की शह पे फ़ना, करना तेरा जब काम है.छीनकर राहत मेरी, कैसे तुझे आराम है ?सब तेरी मर्ज़ी मगर, हर आदमी बदनाम है.दुश्मनी है क्या तेरी, खुशियों से मुझको ये बता !रंजो-ग़म और आँसुओं से, क्या है तेरा वास्ता ?किस्मतों के नाम, इनका ही लिखा पैग़ाम है,आदमी आज़ाद होकर भी, रहा गुलाम है.ऐ खुदा ! किसने दिया, तुझको खुदा का नाम है ?वक़्त की शह पे फ़ना, करना तेरा जब काम है.तोड़कर अपने खिलौने, ग़म तुझे होता नहीं !झूठ है ये बात पर, तू मानता इसको नहीं.ढो रहा सदियों से अपने, सिर पे तू इल्ज़ाम है,फिर भी हमसब को पिलाता, आँसुओं का जाम है.ऐ खुदा ! किसने दिया, तुझको खुदा का नाम है ?वक़्त की शह पे फ़ना, करना तेरा जब काम है.ग़र मेरे हमदम का अब, दीदार हो ना पायेगा,देखना मेरी ज़िद के चलते, आसमाँ झुक जाएगा.मानता हूँ ग़म मेरा, तेरी नज़र में आम है,आम इन्साँ से ही अक्सर, हार जाता राम है.ऐ खुदा ! किसने दिया, तुझको खुदा का नाम है ?वक़्त की शह पे फ़ना, करना तेरा जब काम है.